NCERT Solutions For Class 10th Science Chapter 12 Electricity (विद्युत) in hindi

प्रश्न 1.

विद्युत् परिपथ का क्या अर्थ है?

उत्तर:

विद्युत् परिपथ:

“किसी विद्युत् धारा के सतत बन्द पथ को विद्युत् परिपथ कहते हैं।”

प्रश्न 2.

विद्युत् धारा के मात्रक की परिभाषा लिखिए।

उत्तर:

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विद्युत् धारा का S.I. मात्रक ऐम्पियर होता है।

एक ऐम्पियर:

“यदि किसी चालक के परिच्छेद से प्रति सेकण्ड 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित हो जाता है, तो उस चालक में बहने वाली विद्युत् धारा की मात्रा 1 ऐम्पियर कहलाती है।”

प्रश्न 3.

एक कूलॉम आवेश की रचना करने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या परिकलित कीजिए।

उत्तर:

उत्तर : हम जानते है कि इलेक्ट्रॉन पर आवेश

= 1.6 x 10-19C

माना 1 कूलॉम की रचना करने वाले इलेक्ट्रॉन की संख्या =n

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अतः 1 कूलॉम = 6.25 x 1018 इलेक्ट्रॉन

प्रश्न 1.

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उस युक्ति का नाम लिखिए जो किसी चालक के सिरों पर विभवान्तर बनाए रखने में सहायता करती है?

उत्तर:

विद्युत् सेल या बैटरी।

प्रश्न 2.

यह कहने का क्या तात्पर्य है कि दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर 17 है?

उत्तर:

जब एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक 1 कूलॉम धनावेश को ले जाने में 1 जूल कार्य करना पड़े तो उन दोनों बिन्दुओं के बीच विभवान्तर 1 वोल्ट (1 V) होता है।

प्रश्न 3.

6V बैटरी से गुजरने वाले हर एक कूलॉम आवेश को कितनी ऊर्जा दी जाती है?

उत्तर:

6 जूल ऊर्जा।

प्रश्न 1.

किसी चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है?

उत्तर:

किसी चालक का प्रतिरोध निम्न कारकों पर निर्भर करता है –

  1. चालक की लम्बाई।
  2. चालक की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल।
  3. चालक के पदार्थ की प्रकृति पर।

प्रश्न 2.

समान पदार्थ के दो तारों में यदि एक पतला है तथा दूसरा मोटा हो तो इनमें से किसमें विद्युत् धारा आसानी से प्रवाहित होगी जबकि उन्हें समान विद्युत् स्रोत में संयोजित किया जाता है? क्यों?

उत्तर:

मोटे तार में होकर क्योंकि इसका विद्युत् प्रतिरोध कम है।

प्रश्न 3.

मान लीजिए किसी वैद्युत अवयव के दो सिरों के बीच विभवान्तर को उसके पूर्व के विभवान्तर की तुलना में घटाकर आधा कर देने पर भी उसका प्रतिरोध नियत रहता है। तब उस अवयव से प्रवाहित होने वाली विद्युत् धारा में क्या परिवर्तन होगा?

उत्तर:

विद्युत् धारा का मान आधा रह जायेगा।

प्रश्न 4.

विद्युत् टोस्टरों तथा विद्युत् इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्रातु के क्यों बनाये जाते हैं?

उत्तर:

शुद्ध धातुओं की अपेक्षा किसी मिश्रातु की प्रतिरोधकता अधिक होती है। इसलिए अधिक प्रतिरोध उत्पन्न करने के लिए विद्युत् टोस्टरों तथा विद्युत् इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर मिश्रातु के बनाये जाते हैं।

प्रश्न 5.

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पाठ्य-पुस्तक की तालिका 12.2 में दिए गए आँकड़ों के आधार पर दीजिए –

  1. आयरन (Fe) तथा मरकरी (Hg) में कौन अच्छा विद्युत् चालक है?
  2. कौन-सा पदार्थ सर्वश्रेष्ठ चालक है?

उत्तर:

  1. आयरन (Fe) तथा मरकरी (Hg) में आयरन (Fe) अच्छा विद्युत् चालक है।
  2. सर्वश्रेष्ठ चालक सिल्वर (Ag) है।

प्रश्न 1.

किसी विद्युत् परिपथ का व्यवस्था आरेख खींचिए जिसमें 2V के तीन सेलों की बैटरी, एक 5 Ω प्रतिरोधक, एक 8 Ω प्रतिरोधक, एक 12 Ω प्रतिरोधक तथा एक प्लग कुंजी सभी श्रेणीक्रम में संयोजित हों?

उत्तर:

विद्युत् परिपथ का अभीष्ट व्यवस्था आरेख –

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प्रश्न 2.

प्रश्न 1 का परिपथ दुबारा खींचिए तथा इसमें प्रतिरोधकों से प्रवाहित विद्युत् धारा को मापने के लिए अमीटर तथा 12 Ω के प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवान्तर मापने के लिए वोल्टमीटर लगाइए। अमीटर तथा वोल्टमीटर के क्या पाठ्यांक होंगे?

उत्तर:

विद्युत् परिपथ का अभीष्ट व्यवस्था आरेख –

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संख्यात्मक भाग –

परिपथ में 5 Ω, 8 Ωतथा 12 Ωके प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जुड़े हैं अतः परिपथ का कुल प्रतिरोध –

R = R1 + R2 + R3

R = 5 + 8 + 12

R = 25 Ω

चूँकि बैट्री में तीन सेल श्रेणीक्रम में जुड़ी है अतः बैट्री का विभवांतर

V = 2 + 2+ 2

V = 6V

परिपथ में धारा I = V/R

I = 6/25

I = 0.24 A

अतः ऐमीटर का पाठ्यांक 0.24 A होगा ।

12 Ωके प्रतिरोध के सिरों पर लगे वोल्टमीटर का पाठ्यांक निम्न होगा –

V = I × R3

V = 0.24 × 12

V = 2.88 V

प्रश्न 1.

जब (a) 1 Ω तथा 106 Ω, (b) 1 Ω, 103 Ω तथा 106 Ω के प्रतिरोध पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं तो इनके तुल्य प्रतिरोध के सम्बन्ध में आप क्या निर्णय लेंगे?

उत्तर:

दोनों ही अवस्था में तुल्य प्रतिरोध का मान 1 Ω से कम होगा।

प्रश्न 2.

100 Ω का एक विद्युत् लैम्प, 50 Ω का एक विद्युत् टोस्टर तथा 500 Ω का एक जल फिल्टर 220 V के एक विद्युत् स्रोत से पार्यक्रम में संयोजित है। उस विद्युत् इस्तरी का प्रतिरोध क्या है जिसे यदि समान स्रोत के साथ संयोजित कर दें तो वह उतनी ही विद्युत् धारा लेती है जितनी तीनों युक्तियाँ लेती हैं। यह भी ज्ञात कीजिए कि इस विद्युत् इस्तरी से कितनी विद्युत् धारा प्रवाहित होती है?

हल:

दिया है – V = 220 V

विद्युत लैम्प का प्रतिरोध R1 = 100 Ω

विद्युत टोस्टर का प्रतिरोध R2 = 50 Ω

जल फिल्टर का प्रतिरोध R3 = 500 Ω

चूँकि विद्युत इस्तरी उतनी ही धारा लेती है जितनी तीनों युक्तियाँ लेती है अतः तीनों युक्तियों द्वारा ली गई विद्युत धारा परिपथ में प्रवाहित विद्युत धारा के तुल्य होगी –

I = V/RP (RP = तुल्य प्रतिरोध)

1/RP = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3

1/RP = 1/100 + 1/50 + 1/500

1/RP = 16/500

or   RP = 500/16

RP = 31.25 Ω

अतः I = V/RP

I = 220/31.25

I = 7.04 A

अतः विद्युत इस्तरी में प्रवाहित विद्युत धारा I = 7.04 A होगी ।

चूँकि विद्युत इस्तरी समान स्रोत के साथ संयोजित है अतः इसका प्रतिरोध निम्न होगा –

R = V/I

R = 220/7.04

R = 31.25 Ω

प्रश्न 3.

श्रेणीक्रम में संयोजित करने के स्थान पर वैद्युत् युक्तियों को पार्यक्रम में संयोजित करने के क्या लाभ हैं?

उत्तर:

श्रेणीक्रम में संयोजित युक्तियों में समान धारा प्रवाहित होती है जबकि प्रत्येक युक्ति को उनके ठीक प्रकार कार्य सम्पादन हेतु अलग-अलग धाराओं की आवश्यकता होती है जो पार्श्वक्रम में ही सम्भव है श्रेणीक्रम में नहीं।

इसके अतिरिक्त एक युक्ति के खराब होने पर श्रेणीक्रम में सभी युक्तियाँ कार्य करना बन्द कर देंगी जबकि पार्श्वक्रम में एक युक्ति के खराब होने या बन्द होने की स्थिति में अन्य युक्तियाँ कार्य करती रहेंगी।

श्रेणीक्रम में हम इच्छानुसार एक या अधिक युक्तियों को प्रयोग में नहीं ला सकते, सभी युक्तियों को एक साथ ही प्रयोग में लाना होगा जबकि पार्श्वक्रम में हम ऐसा कर सकते हैं। इसलिए युक्तियों को पार्श्वक्रम में संयोजित करते हैं।

प्रश्न 4.

2 Ω, 3 Ω तथा 6 Ω के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि संयोजन का कुल प्रतिरोध –

(a) 4 Ω, (b) 1 Ω हो?

उत्तर:

(a) यदि हम 3 Ω तथा 6 Ω के प्रतिरोधों को समान्तर क्रम में संयोजित कर दें और इसके साथ 2 Ω के प्रतिरोध को श्रेणीक्रम में संयोजित कर दें तो हमें तुल्य प्रतिरोध का मान 4 Ω प्राप्त हो जायेगा जैसा परिपथ आरेख में दिखाया गया है ।

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3 Ω तथा 6 Ω पार्श्वक्रम में है अतः इनका तुल्य प्रतिरोध (RP ) –

1/RP = 1/3 + 1/6

1/RP = 3/6

or    RP = 6/3 = 2 Ω

यह RP = 2 Ω का प्रतिरोध 2 Ω के साथ श्रेणीक्रम में जुड़ा है । अतः

तुल्य प्रतिरोध R = R1 + RP

R = 2 + 2

R = 4 ओम

(b) यदि तीनों प्रतिरोधों को समानान्तर क्रम में संबद्ध किया जायेगा तब हमें 1 Ω का तुल्य प्रतिरोध प्राप्त होगा ।

अतः 1/RP = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3

1/RP = 1/2 + 1/3 + 1/6

1/RP = 6/6

or   RP = 6/6

RP = 1 Ω

प्रश्न 5.

4 Ω, 8 Ω, 12 Ω तथा 24 Ω प्रतिरोध की चार कुण्डलियों को किस प्रकार संयोजित करें कि संयोजन से –

(a) अधिकतम, (b) निम्नतम प्रतिरोध प्राप्त हो सके?

उत्तर:

(a) अधिकतम प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए चारों कुण्डलियों को हम श्रेणीक्रम में संयोजित करेंगे।

(b) निम्नतम प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए हम चारों कुण्डलियों को पार्यक्रम में संयोजित करेंगे।

प्रश्न 1.

किसी विद्युत् हीटर की डोरी क्यों उत्तप्त नहीं होती जबकि उसका तापन अवयव उत्तप्त हो जाता है।

उत्तर:

विद्युत् हीटर की डोरी का प्रतिरोध नगण्य होता है। इसलिए वह उत्तप्त नहीं होती जबकि उसके तापन अवयव का प्रतिरोध अधिक होने से उसमें अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है और वह उत्तप्त हो जाता है।

प्रश्न 2.

एक घण्टे में 50 V विभवान्तर से 96000 कूलॉम आवेश को स्थानान्तरित करने में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए।

हल:

दिया है: V = 50 V एवं q= 96000 C

ऊष्मा = V × q = 50 V × 96000 C = 48,00,000 J

अतः अभीष्ट उत्पन्न ऊष्मा = 48,00,000 J अर्थात् 4,800 kJ – उत्तर

प्रश्न 3.

20 Ω प्रतिरोध की कोई विद्युत् इस्तरी 5 A विद्युत्धारा लेती है, 30 s में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए।

हल:

दिया है: R = 20 Ω, I = 5 A, t = 30s

चूँकि

उत्पन्न ऊष्मा = I2Rt = (5)2 × 20 × 30 J = 15,000 J अर्थात् 15 kJ.

अत: अभीष्ट उत्पन्न ऊष्मा = 15,000 J अर्थात् 15 kJ – उत्तर

प्रश्न 1.

विद्युत् धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर का निर्धारण कैसे किया जाता है?

उत्तर:

विद्युत् धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर का निर्धारण विद्युत् धारा की मात्रा एवं विभवान्तर के गुणनफल के द्वारा किया जाता है।

अर्थात्

प्रदत्त विद्युत् ऊर्जा की दर = विद्युत् सामर्थ्य

P = विभवान्तर V × विद्युत् धारा I ⇒ P = VI

प्रश्न 2.

कोई विद्युत् मोटर 220 V के विद्युत् स्रोत से 5.0 A की विद्युत् धारा लेता है। मोटर की शक्ति निर्धारित कीजिए तथा 2 घण्टे में मोटर द्वारा उपयुक्त ऊर्जा परिकलित कीजिए।

हल:

दिया है:

विभवान्तर V = 220 V, विद्युत् धारा i = 5.0 A, समय t = 2 घण्टे।

चूँकि मोटर की शक्ति P = VI = 220 × 5.0 = 1100 W

 = 1.1 kW

2 घण्टे में उपयुक्त ऊर्जा = 2 × 1.1 = 2.2 kWh

अतः मोटर की अभीष्ट सामर्थ्य = 1.1 kW एवं 2 घण्टे में उपयुक्त ऊर्जा की अभीष्ट मात्रा = 2.2 kWh – उत्तर

पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.

प्रतिरोध R के किसी तार के टुकड़े को पाँच बराबर भागों में काटा जाता है। इन टुकड़ों को फिर पार्यक्रम में संयोजित कर देते हैं। यदि संयोजन का तुल्य प्रतिरोध R’ है, तो R/R’ अनुपात का मान क्या है?

(a) 1/25

(b) 1/5

(c) 5

(d) 25

उत्तर:

(d) 25

प्रश्न 2.

निम्नलिखित में से कौन-सा पद विद्युत् परिपथ में विद्युत् शक्ति को निरूपित नहीं करता?

(a) I2R

(b) IR2

(c) VI

(d) V2/R

उत्तर:

(b) IR2

प्रश्न 3.

किसी विद्युत् बल्ब का अनुमतांक 220 V : 100 W है। जब इसे 110 V पर प्रचलित करते हैं तब इसके द्वारा उपयुक्त शक्ति कितनी होगी?

(a) 100 W

(b) 75 W

(c) 50 W

(d) 25 W

उत्तर:

(d) 25 W

प्रश्न 4.

दो चालक तार जिनके पदार्थ, लम्बाई तथा व्यास समान हैं, किसी विद्युत् परिपथ में पहले श्रेणीक्रम में और फिर पार्श्वक्रम में संयोजित किये जाते हैं। श्रेणीक्रम तथा पार्श्वक्रम संयोजन में उत्पन्न ऊष्माओं का अनुपात क्या होगा?

(a) 1 : 2

(b) 2 : 1

(c) 1 : 4

(d) 4 : 1

उत्तर:

(c) 1 : 4

प्रश्न 5.

किसी विद्युत् परिपथ में दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर मापने के लिए वोल्टमीटर को किस प्रकार संयोजित किया जाता है?

उत्तर:

समान्तर क्रम (पावक्रम) में।

प्रश्न 6.

किसी ताँबे के तार का व्यास 0.5 mm तथा प्रतिरोधकता 1.6 × 10-8 Ωm है। 10 Ω प्रतिरोध का प्रतिरोधक बनाने के लिए कितने लम्बे तार की आवश्यकता होगी? यदि इससे दो गुने व्यास का तार लें तो प्रतिरोध में क्या अन्तर आयेगा?

हल:

दिया है:

तार का व्यास, D = 0.5 mm = 0.5×103 m

कॉपर का प्रतिरोध, P = 1.6 x 10-8 Ω m

इच्छित प्रतिरोधकता, R = 10 Ω

Pl           RA          R(  лD2/4)       лRD2

= __, l  =  _______  = ______________ + ______

A             P                           P                 4P

 лD2

[∴ A= лr2  = (D/2)2  = _____ ]

4

3.14x10x(0.5×10-3)2

L = _______________________   m = 122.7 m

4×1.6×10-8

प्रश्न 7.

किसी प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवान्तर V के विभिन्न मानों के लिए उससे प्रवाहित विद्युत् धाराओं के संगत मान निम्नवत् हैं –

I(ऐम्पियर मे)0.51.02.03.04.0
V(वोल्ट में)1.63.46.710.213.2

V और I के बीच ग्राफ खींचकर इस प्रतिरोधक का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।

हल:

विभवान्तर V एवं विद्युत् धारा I में ग्राफ –

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For V=4 V (i.e., 9V-5V), I = 1.25 A (i.e., 2.65 A- 1.40 A).

V         4V

इसलिए, R =____ = _________

                                             I        1.25 A

= 3.2 Ω

प्रश्न 8.

किसी अज्ञात प्रतिरोध के प्रतिरोधक के सिरों से 12 V की बैटरी को संयोजित करने पर परिपथ में 2.5 m A विद्युत् धारा प्रवाहित होती है। प्रतिरोधक का प्रतिरोध परिकलित कीजिए।

हल:

V= 12 V, I = 2.5 mA = 2.5×10-3 A

V        12V

प्रतिरोधक का प्रतिरोध = R =___ = ____________ = 4800 Ω

I      2.3×10-3

प्रश्न 9.

9 V की किसी बैटरी को 0.2 Ω, 0.3 Ω,0.4 Ω,0.5 Ω तथा 12 Ω के प्रतिरोधकों के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित किया गया है। 12 Ω के प्रतिरोधक से कितनी विद्युत् धारा प्रवाहित होगी?

हल:

सभी प्रतिरोध श्रेणीक्रम में हैं इसलिए

Rs = 0.2Ω + 0.3Ω + 0.4Ω + 0.5Ω + 12Ω = 13.4 Ω

V          9V

परिपथ में विद्युत्, I = ____ = _________ 0.67Ω.

Rs           13.4 Ω

श्रेणीक्रम में सभी प्रतिरोधकों में प्रवाहित विद्युत् समान होगी

इसलिए सभी 12 प्रतिरोधकों से प्रवाहित विद्युत् होगी = 0.67 A

प्रश्न 10.

176 Ω प्रतिरोध के कितने प्रतिरोधकों को पार्यक्रम में संयोजित करें कि 220 V के विद्युत् स्रोत के संयोजन से 5 A विद्युत् धारा प्रवाहित हो।

उत्तर-I = 5A N= 220 V

V        220V

परिपथ की प्रतिरोधकता, R =_____ = ________ = 44Ω

I           5A

प्रत्येक प्रतिरोधक का प्रतिरोध, r = 176 Ω

यदि n प्रतिरोधक, प्रत्येक की प्रतिरोधकता r को पार्यक्रम में संयोजित करें तो इच्छित प्रतिरोध हो

r

R = ___

n

176               176

or   44 = ______  or = _____ = 4

n                    44

प्रश्न 11.

यह दर्शाइए कि आप 6 Ω प्रतिरोधक के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करोगे? प्राप्त संयोजन का प्रतिरोध –

(i) 9 Ω

(ii) 2 Ω हो।

हल:

(i)6 Ω के तीन प्रतिरोधकों से 9 Ω का प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए हमें दो प्रतिरोधकों को पार्यक्रम तथा अन्य को इनके श्रेणीक्रम में लगाना होगा।

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(ii) 2 Ω प्रतिरोधकता प्राप्त करने के लिए हमें तीनों प्रतिरोधों को पार्यक्रम में लगाना होगा।

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प्रश्न 12.

220 V की विद्युत् लाइन पर उपयोग किए जाने वाले बहुत से बल्बों का अनुमतांक 10 W है। यदि 220 V लाइन से अनुमत अधिकतम विद्युत् धारा 5 A है तो इस लाइन के दो तारों के बीच कितने बल्ब पार्यक्रम में संयोजित किए जा सकते हैं?

हल:

       V2         (220)2

उत्तर-प्रत्येक बल्ब का प्रतिरोध, r = ____ = ______ = 4840 Ω

P          10

                                                            220 V

परिपथ की कुल प्रतिरोधकता, R = ________ = ______ = 44 Ω

5 V

मान लीजिए कि बल्बों की संख्या n है और प्रतिरोधकता R प्राप्त करने के लिए

r                 r              4840

R = __, or n  =  _______  = _________ =  Ω =  110

n                  R                       44 Ω

प्रश्न 13.

किसी विद्युत् भट्टी की तप्त प्लेट दो प्रतिरोधक कुण्डलियों A तथा B की बनी हुई हैं जिनमें प्रत्येक का प्रतिरोधक 24 Ω है तथा इन्हें पृथक-पृथक श्रेणीक्रम में अथवा पार्श्वक्रम में संयोजित करके उपयोग किया जा सकता है। यदि यह भट्टी 220 V विद्युत् स्रोत से संयोजित की जाती है तो तीनों प्रकरणों में विद्युत् धाराएँ क्या हैं?

हल:

(i) विभवांतर = 220V, प्रत्येक कुंडली का प्रतिरोध, r = 2 Ω

(ii) कुंडली A तथा B को श्रेणीक्रम में जोड़ने पर प्रतिरोध, Rs = r + r = 2r = 48 Ω

V        220

श्रेणीकृत कुंडलियों में प्रवाहित विद्युत्, Is = ____ = _____ =  4.58 A

Rs           48 Ω

r         24

(iii) कुंडली A तथा B को पार्श्वक्रम में जोड़ने पर प्रतिरोध, Rp = ____ = ______ = = 12 Ω

2         2

V       220 V

(iii) पार्श्वक्रमित कुंडलियों में प्रवाहित विद्युत् Ip = ____ = ______ = 18.3 A

Rp         12 Ω

प्रश्न 14.

निम्नलिखित परिपथों में प्रत्येक में 2 Ω प्रतिरोधक द्वारा उपमुक्त शक्तियों की तुलना कीजिए –

(i) 6 V की बैटरी से संयोजित 1 Ω तथा 2 Ω प्रतिरोधक श्रेणीक्रम संयोजन।

(ii) 4 V बैटरी से संयोजित 12 Ω तथा 2 Ω पार्श्वक्रम संयोजन।

हल:

(i) क्योंकि 6 V की बैटरी को 1 Ω तथा 2 Ω के प्रतिरोध के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित किया गया है। इसलिए इसमें प्रवाहित विद्युत है-

6 V               6 V

I = ________________ = _____ = 2 A

1 Ω + 2 Ω           3 Ω

2 Ω प्रतिरोध में प्रयोग हुई शक्ति, P = I2 R = (2)2 x 2 = 8 W

(ii) 4V की बैटरी को 12 Ω तथा 2 Ω के प्रतिरोध के साथ संयोजित श्रेणी में जोड़ने पर उसमें प्रवाहित विभवांतर होगा, V = 4V

V2      (4)2

2 Ω के प्रतिरोध में प्रयोग की गई शक्ति, P = _____= _____ = 8 W

R        2

P1         8 W

इस प्रकार, ____ = ________ = 1

P2         8 W

प्रश्न 15.

दो विद्युत् लैम्प जिनमें से एक का अनुमतांक 100 W : 220 V तथा दूसरे का 60 W : 220 V है। विद्युत् मेन्स के साथ पार्श्वक्रम में संयोजित है। यदि विद्युत् आपूर्ति की वोल्टता 220 V है, तो विद्युत् में से कितनी धारा ली जाती है?

हल:

पहले लैंप की शक्ति (P) = 100 वाट

पहले लैंप की विभवांतर (V) = 220 वोल्ट

P1

पहले लैंप में प्रवाहित धारा (I1) = ____

V

100

= _______ ऐंपियर

220

V            220

पहले लैंप का प्रतिरोध (R1) = ______ = ____________

                                                                                      I1              100/200

220×200

= ___________ = 484 ओह्म

100

दूसरे लैंप की शक्ति (P) = 60 वाट

दूसरे लैंप का विभवांतर (V) = 220 वोल्ट

P2           60

दूसरे लैंप में प्रवाहित धारा (I2) = ______ = _____ ऐंपियर

V          220

V                220

पहले लैंप का प्रतिरोध (R2) = ______ = ________

I2        60/220

220×220      2420

= ___________ = __________ ओह्म

60                3

पार्श्वक्रम में परिणामी प्रतिरोध R निम्नलिखित होगा-

1         1                1          1               3

__ =  _________  + ______ = ______ +  = _______

R        R1                      R2       484           2420

5 + 3          8

= _______ =  ________

2420       2420

2420

R = _______ ओह्म

8

V = 220 वोल्ट

V

में से ली जाने वाली धारा (I) = ____

                                                                                        R

220         220×8

= _______ =  ________ __= 0.727 ऐंपियर

2420/8     2420

प्रश्न 16.

किसमें अधिक विद्युत् ऊर्जा उपमुक्त होती है; 250 W टी. वी. सैट जो एक घण्टे तक चलाया जाता है अथवा 120 W का विद्युत् हीटर जो 10 मिनट के लिए चलाया जाता है।

हल:

250 W के TV सेट द्वारा 1 घंटे में उपभुक्त ऊर्जा,

= 250 W x 1h = 250 Wh

120 W के विद्युत हीटर द्वारा 10 मिनट में उपभुक्त ऊर्जा,

1

= 120 W x _____ h = 20 Wh

6

प्रश्न 17.

8 Ω प्रतिरोध का कोई विद्युत् हीटर विद्युत् मेन्स से 2 घण्टे तक 15 A विद्युत् धारा लेता है। हीटर में उत्पन्न ऊर्जा की दर परिकलित कीजिए।

हल:

I = 15A, R = 8 Ω, t = 2h

विद्युत शक्ति, P = I2R (15)2 x 8 = 1800 W

एवं 1800 J/S

प्रश्न 18.

निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए –

(a) विद्युत् लैम्पों के तन्तुओं के निर्माण में प्रायः एक मात्र टंगस्टन का ही उपयोग क्यों किया जाता है?

(b) विद्युत् तापन युक्तियों जैसे ब्रेड-टोस्टर तथा विद्युत् इस्तरी के चालक शुद्ध धातुओं के स्थान पर मिश्रातुओं के क्यों बनाए जाते हैं?

(c) घरेलू विद्युत् परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है?

(d) किसी तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल में परिवर्तन के साथ किस प्रकार परिवर्तित होता है?

(e) विद्युत् संचारण के लिए प्रायः कॉपर तथा ऐलुमिनियम के तारों का उपयोग क्यों किया जाता है?

उत्तर:

(a) बल्बों के तन्तु बनाने में बहुत पतले टंगस्टन के तारों का उपयोग होता है क्योंकि इनका गलनांक अति उच्च होता है। ये गर्म अवस्था में ऑक्सीकृत नहीं होते तथा ऊष्मा को रोककर प्रकाश उत्पन्न करते हैं।

(b)किसी मिश्रधातु की प्रतिरोधकता शुद्ध धातु की अपेक्षा अधिक होती है तथा तापमान के परिवर्तन के साथ मिश्रधातुओं की प्रतिरोधता कम बदलती है। उनका शीघ्र ऑक्सीकरण नहीं होता और वे उच्च तापमान को सह सका हैं। इन्हीं कारणों से टोस्टर और विद्युत प्रैस जैसे गर्म होने वाले उपकरणों में प्रयुक्त होने वाले चालकों में मिश्रधातुक का प्रयोग किया जाता है। उच्च प्रतिरोधकता इन्हें जलाने से बचा लेती है।

(c) श्रेणीक्रम में संयोजित युक्तियों में समान धारा प्रवाहित होती है जबकि प्रत्येक युक्ति को उनके ठीक प्रकार कार्य सम्पादन हेतु अलग-अलग धाराओं की आवश्यकता होती है जो पार्श्वक्रम में ही सम्भव है श्रेणीक्रम में नहीं।

इसके अतिरिक्त एक युक्ति के खराब होने पर श्रेणीक्रम में सभी युक्तियाँ कार्य करना बन्द कर देंगी जबकि पार्श्वक्रम में एक युक्ति के खराब होने या बन्द होने की स्थिति में अन्य युक्तियाँ कार्य करती रहेंगी।

श्रेणीक्रम में हम इच्छानुसार एक या अधिक युक्तियों को प्रयोग में नहीं ला सकते, सभी युक्तियों को एक साथ ही प्रयोग में लाना होगा जबकि पार्श्वक्रम में हम ऐसा कर सकते हैं। इसलिए युक्तियों को पार्श्वक्रम में संयोजित करते हैं।

(d) किसी तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल A के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात् क्षेत्रफल बढ़ने पर प्रतिरोध कम होता है तथा कम होने पर बढ़ता है।

(e) विद्युत् संचारण के लिए प्राय: कॉपर तथा ऐलुमिनियम के तारों का उपयोग किया जाता है क्योंकि इनकी प्रतिरोधकता बहुत कम है। अत: ये अतितप्त नहीं होते।

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.

प्रतिरोध का मात्रक है –

(a) ऐम्पियर।

(b) वाट।

(c) ओम।

(d) वोल्ट।

उत्तर:

(c) ओम।

प्रश्न 2.

विद्युत् धारा का S.I. मात्रक है –

(a) जूल।

(b) ऐम्पियर।

(c) वोल्ट।

(d) वाट।

उत्तर:

(b) ऐम्पियर।

प्रश्न 3.

विद्युत् शक्ति का अन्तर्राष्ट्रीय पद्धति में मात्रक है –

(a) अश्व शक्ति।

(b) वाट।

(c) किलोवाट घण्टा।

(d) ये सभी। (2019)

उत्तर:

(b) वाट।

प्रश्न 4.

विभवान्तर का मात्रक है –

(a) ऐम्पियर।

(b) वोल्ट।

(c) ओम।

(d) वाट।

उत्तर:

(b) वोल्ट।

प्रश्न 5.

विभवान्तर का मापक यन्त्र है –

(a) अमीटर।

(b) वोल्टमीटर।

(c) लैक्टोमीटर।

(d) शुष्क सेल।

उत्तर:

(b) वोल्टमीटर।

प्रश्न 6.

विद्युत् धारा का मापक यन्त्र है –

(a) अमीटर।

(b) वोल्टमीटर।

(c) लैक्टोमीटर।

(d) शुष्क सेल।

उत्तर:

(a) अमीटर।

प्रश्न 7.

किसी धातु के तार की प्रतिरोधकता निर्भर करती है –

(a) इसकी लम्बाई पर।

(b) इसकी मोटाई पर।

(c) इसकी आकृति पर।

(d) इसके पदार्थ की प्रकृति पर।

उत्तर:

(d) इसके पदार्थ की प्रकृति पर।

प्रश्न 8.

एक विद्युत् बल्ब की तन्तु ने 1 A विद्युत् धारा ली। इस तन्तु के परिच्छेद से 16 s में प्रवाहित इलेक्ट्रॉनों की लगभग संख्या होगी

(a) 1020

(b) 1016

(c) 1018

(d) 1023

उत्तर:

(a) 1020

प्रश्न 9.

पाँच प्रतिरोधक तारों के संयोजन से कितना अधिकतम प्रतिरोध प्राप्त किया जा सकता है जबकि प्रत्येक प्रतिरोधक का प्रतिरोध 1/5 Ω है?

(a) 1/5 Ω

(b) 10 Ω

(c) 5 Ω

(d) 1 Ω

उत्तर:

(d) 1 Ω

प्रश्न 10.

पाँच प्रतिरोधकों के संयोजन से न्यूनतम कितना प्रतिरोध प्राप्त किया जा सकता है जबकि प्रत्येक प्रतिरोधक का प्रतिरोध 1/5 Ω है –

(a) 1/5 Ω

(b) 1/25 Ω

(c) 1/10 Ω

(d) 25 Ω

उत्तर:

(b) 1/25 Ω

प्रश्न 11.

एक/लम्बाई एक समान परिच्छेद क्षेत्रफल A वाला चालक तार का प्रतिरोध R है। दूसरे चालक की लम्बाई 2 l तथा प्रतिरोध R है समान पदार्थ का बना है तो उसका परिच्छेद होगा –

(a) A/2

(b) 3 A/2

(c) 2 A

(d) 3 A

उत्तर:

(c) 2 A

प्रश्न 12.

यदि किसी प्रतिरोधक में होकर बहने वाली धारा I को दुगुना कर दिया जाय अर्थात् 100% बढ़ा दिया जाय तो उसकी विद्युत् सामर्थ्य में वृद्धि होगी (जबकि उसका तापमान नियत रहता है) –

(a) 100%

(b) 200%

(c) 300%

(d) 400%

उत्तर:

(c) 300%

प्रश्न 13.

किसी चालक की प्रतिरोधकता परिवर्तित नहीं होती यदि –

(a) चालक का पदार्थ परिवर्तित कर दिया जाय।

(b) चालक का ताप परिवर्तित कर दिया जाय।

(c) चालक का आकार बदल दिया जाय।

(d) दोनों पदार्थ एवं ताप परिवर्तित कर दिया जाय।

उत्तर:

(c) चालक का आकार बदल दिया जाय।

प्रश्न 14.

एक विद्युत् परिपथ में 2 Ω एवं 4 Ω के दो प्रतिरोधक श्रेणीक्रम में एक 6 V बैटरी के साथ संयोजित किए गए हैं तो 4 Ω के प्रतिरोधक से 5 s में ऊष्मा प्राप्त होगी –

(a) 5 J

(b) 10 J

(c) 20 J

(d) 30 J

उत्तर:

(c) 20 J

प्रश्न 15.

एक बिजली की केतली जब 220 V पर प्रयोग की जाती है तो 1 kW विद्युत् सामर्थ्य लेती है। किस दर का एक फ्यूज तार इसके लिए प्रयुक्त होना चाहिए?

(a) 1 A

(b) 2 A

(c) 4 A

(d) 5 A

उत्तर:

(d) 5 A

प्रश्न 16.

एक विद्युत् परिपथ में तीन विद्युत् बल्ब A, B एवं C क्रमश: 40 W, 60 W एवं 100 W क्षमता के समान्तर क्रम में विद्युत् स्रोत से संयोजित किए जाते हैं। उनकी रोशनी के सन्दर्भ में निम्न में कौन-सा कथन सत्य है?

(a) सभी समान रोशनी देंगे।

(b) बल्ब A की रोशनी सर्वाधिक होगी।

(c) बल्ब B की रोशनी बल्ब A से अधिक होगी।

(d) बल्ब C की रोशनी बल्ब B से कम होगी।

उत्तर:

(c) बल्ब B की रोशनी बल्ब A से अधिक होगी।

प्रश्न 17.

जब 2 Ω एवं 4 Ω प्रतिरोध के दो प्रतिरोधक एक बैटरी से संयोजित किए जाते हैं तो –

(a) उनमें समान विद्युत् धारा प्रवाहित होगी जब उनको समान्तर क्रम में संयोजित किया जाय।

(b) उनमें समान विद्युत् धारा प्रवाहित होगी जब उनको श्रेणीक्रम में संयोजित किया जाय।

(c) उनके सिरों पर समान विभवान्तर होगा जब उनको श्रेणीक्रम में संयोजित किया जाय।

(d) उनके सिरों पर अलग-अलग विभवान्तर होगा जब उनको समान्तर क्रम में संयोजित किया जाय।

उत्तर:

(b) उनमें समान विद्युत् धारा प्रवाहित होगी जब उनको श्रेणीक्रम में संयोजित किया जाय।

प्रश्न 18.

विद्युत् सामर्थ्य का मात्रक इस प्रकार भी प्रदर्शित किया जा सकता है –

(a) वोल्ट-ऐम्पियर।

(b) किलोवाट-घण्टा।

(c) वाट-सेकण्ड।

(d) जूल-सेकण्ड।

उत्तर:

(a) वोल्ट-ऐम्पियर।

रिक्त स्थानों की पूर्ति

  1. शुद्ध जल विद्युत् का ……. होता है।
  2. एक अश्व शक्ति = … वाट।
  3. किसी तार का प्रतिरोध उसकी लम्बाई के ……. होता है।
  4. किसी तार का प्रतिरोध उसके परिच्छेद के ………… होता है।
  5. किसी तार की प्रतिरोधकता पर उसकी आकृति का ……… पड़ता है।

उत्तर:

  1. कुचालक
  2. 746
  3. अनुक्रमानुपाती
  4. व्युत्क्रमानुपाती
  5. कोई प्रभाव नहीं।

सत्य/असत्य कथन

  1. अधिकतम प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में संयोजित करना चाहिए।
  2. I = V R अर्थात् विद्युत् धारा = विभवान्तर × प्रतिरोध।
  3. न्यूनतम प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए प्रतिरोधकों को समान्तर क्रम में संयोजित करना चाहिए।
  4. हॉर्स पावर विद्युत् ऊर्जा का मात्रक है।
  5. किसी चालक में प्रवाहित विद्युत् धारा एवं उसके सिरों के मध्य विभवान्तर के परस्पर सम्बन्ध का पता ओम ने लगाया था।

उत्तर:

  1. सत्य।
  2. असत्य।
  3. सत्य।
  4. असत्य।
  5. सत्य।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.

विद्युत् विभव किसे कहते हैं? इसका मात्रक लिखिए।

उत्तर:

विद्युत् विभव:

“एकांक धनावेश को अनन्त से विद्युत् क्षेत्र के किसी बिन्दु तक लाने में किए गए कार्य को इस बिन्दु का विद्युत् विभव कहते हैं।” इसका मात्रक वोल्ट है।

प्रश्न 2.

एक वोल्ट विभव से क्या समझते हो?

उत्तर:

एक वोल्ट विभव:

“एकांक धनावेश को अनन्त से विद्युत् क्षेत्र के किसी बिन्दु तक लाने में यदि एक जूल कार्य करना पड़ता है तो विद्युत् क्षेत्र के उस बिन्दु पर विभव का मान एक वोल्ट होगा।”

प्रश्न 3.

विद्युत् प्रतिरोध किसे कहते हैं? इसका मात्रक क्या है?

उत्तर:

विद्युत् प्रतिरोध:

“चालक की परमाणु संरचना के कारण इलेक्ट्रॉन प्रवाह में उत्पन्न अवरोध के परिमाण को चालक का विद्युत् प्रतिरोध कहते हैं।” इसका मात्रक ओम होता है।

प्रश्न 4.

“एक ओम प्रतिरोध” से क्या समझते हो?

उत्तर:

एक ओम प्रतिरोध:

“यदि किसी चालक के सिरों पर एक वोल्ट का विभवान्तर आरोपित करने पर उस चालक में एक ऐम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही हो तो उस चालक का प्रतिरोध एक ओम होता है।”

प्रश्न 5.

विद्युत् प्रतिरोधकता (विशिष्ट प्रतिरोध) किसे कहते हैं? इसका मात्रक लिखिए।

उत्तर:

विद्यत् प्रतिरोधकता (विशिष्ट प्रतिरोध):

“एक मीटर लम्बे तथा एक वर्ग मीटर अनुप्रस्थ काट वाले चालक तार का प्रतिरोध, उस चालक पदार्थ की विद्युत् प्रतिरोधकता (विशिष्ट प्रतिरोध) कहलाता है।” इसका मात्रक ओम-मीटर है।

प्रश्न 6.

विद्युत् शक्ति को परिभाषित कीजिए। इसका मात्रक क्या है?

उत्तर:

विद्युत् शक्ति: “किसी विद्युत् उपकरण में विद्युत् ऊर्जा के व्यय की दर विद्युत् शक्ति कहलाती है।”

प्रश्न 7.

“एक वाट विद्युत् शक्ति” क्या होती है?

उत्तर:

एक वाट विद्युत् शक्ति:

“यदि किसी विद्युत् परिपथ में एक जूल प्रति सेकण्ड की विद्युत् ऊर्जा की हानि हो रही है तो परिपथ की विद्युत् शक्ति एक वाट कहलाती है।”

प्रश्न 8.

विद्युत् धारा के ऊष्मीय प्रभाव से क्या समझते हो?

उत्तर:

विद्युत् धारा का ऊष्मीय प्रभाव:

“जब किसी प्रतिरोधक में विद्युत् धारा प्रवाहित की जाती है तो ऊष्मा उत्पन्न होती है, विद्युत् धारा के द्वारा ऊष्मा उत्पन्न होने की यह परिघटना विद्युत् धारा का ऊष्मीय प्रभाव कहलाती है।”

प्रश्न 9.

विद्युत् धारा के ऊष्मीय प्रभाव के अनुप्रयोग लिखिए।

उत्तर:

विद्यत धारा के ऊष्मीय प्रभाव के अनप्रयोग:

विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव का अनुप्रयोग विद्युत् ऊष्मीय युक्तियों में होता है; जैसे-विद्युत् आयरन, विद्युत् हीटर, गीजर, इलेक्ट्रिक केतली आदि घरेलू उपकरणों में तथा बल्बों में प्रकाश के लिए होता है। इसके अतिरिक्त फ्यूज के तार में विद्युत् उपकरणों को बचाने के लिए भी होता है।

प्रश्न 10.

अमापी का प्रतिरोध कम या अधिक क्या होना चाहिए?

उत्तर:

अमापी (अमीटर) के प्रतिरोध को शून्य के निकटतम होना चाहिए बल्कि आदर्श स्थिति में इसका मान शून्य होना चाहिए अन्यथा यह विद्युत् धारा का वास्तविक मापन नहीं कर सकता।

प्रश्न 11.

फ्यूज वायर किस प्रकार विद्युत् उपकरणों को नष्ट होने से बचाता है?

उत्तर:

जब भी विद्युत् परिपथ में अतिभारक या लघु पाथन के कारण धारा का मान बढ़ता है तो फ्यूज वायर में ऊष्मा उत्पन्न होने के कारण उसका ताप बढ़ जाता है तथा फ्यूज वायर पिघल जाता है जिसमें परिपथ टूट जाता है और उपकरण बच जाते हैं।

प्रश्न 12.

विद्युत् ऊर्जा का व्यापारिक मात्रक क्या है? इसे जूल के पदों में लिखिए।

उत्तर:

विद्युत् ऊर्जा का व्यापारिक मात्रक किलोवाट घण्टा (kWh) होता है।

1 kWh = 3.6 × 106 J

प्रश्न 13.

घरेलू परिपथ में समान्तर क्रम में उपकरणों का संयोजन क्यों किया जाता है?

उत्तर:

घरेलू परिपथ में विद्युत् उपकरणों का संयोजन समान्तर क्रम में इसलिए किया जाता है ताकि उन सभी उपकरणों को समान विभवान्तर उपलब्ध हो सके।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.

ठोस चालक के लिए विद्युत् प्रतिरोध का मान किन-किन बातों पर निर्भर करता है और किस प्रकार?

उत्तर:

ठोस चालक के विद्युत् प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक:

ठोस चालक का विद्युत् प्रतिरोध निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है –

  1.  चालक की लम्बाई पर:चालक का प्रतिरोध R, चालक की लम्बाई l के अनुक्रमानुपाती (समानुपाती) होता है अर्थात्R ∝ l
  2. चालक के अनुप्रस्थ काट (क्षेत्रफल) पर:चालक का प्रतिरोध R, चालक के अनुप्रस्थ काट (क्षेत्रफल) A के व्युत्क्रमानुपाती (विलोमानुपाती) होता है अर्थात्R ∝ 
  3. चालक के ताप पर:चालक का ताप बढ़ाने पर प्रतिरोध बढ़ जाता है तथा घटाने पर घट जाता है।
  4. चालक के पदार्थ की प्रकृति पर:चालक का प्रतिरोध उसके पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है।

प्रश्न 2.

जूल के तापन नियम की व्याख्या कीजिए।

अथवा

जूल के तापन नियम को समझाइए।

उत्तर:

जूल का तापन नियम:

जब किसी प्रतिरोधक R में I विद्युत् धारा t समय तक प्रवाहित की जाती है तो उस प्रतिरोधक में विद्युत् धारा के ऊष्मीय प्रभाव से उत्पन्न ऊष्मा की मात्रा (H):

H = I2Rt यदि I ऐम्पियर में, R ओम में तथा t सेकण्ड में हो तो H का मान जूल में होता है। इस नियम को जूल का तापन नियम कहते हैं।

इस नियम के अनुसार:

  1. प्रतिरोधक में उत्पन्न ऊष्मा H, उसमें प्रवाहित धारा I के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है। अर्थात्,H ∝ I2
  2. प्रतिरोधक में उत्पन्न ऊष्मा की मात्रा H, उसके प्रतिरोध R के अनुक्रमानुपाती होती है। अर्थात्,H ∝ R
  3. प्रतिरोधक में उत्पन्न ऊष्मा की मात्रा H, समय t के अनुक्रमानुपाती होती है। अर्थात्H ∝ t

प्रश्न 3.

प्रतिरोधकता (विशिष्ट प्रतिरोध) क्या है? एक विद्युत् परिपथ में श्रेणीक्रम में एक धात्विक तार से बने प्रतिरोधक से संयोजित अमीटर का पाठ्यांक 5 A है। अमीटर का पाठ्यांक आधा हो जाता है जब उस प्रतिरोधक की लम्बाई दूनी कर दी जाती है।

उत्तर:

प्रतिरोधकता (विशिष्ट प्रतिरोध):

“एक मीटर लम्बे तथा एक वर्ग मीटर अनुप्रस्थ काट वाले चालक तार का प्रतिरोध, उस चालक पदार्थ की विद्युत् प्रतिरोधकता (विशिष्ट प्रतिरोध) कहलाता है।” इसका मात्रक ओम-मीटर है।

चूँकि प्रतिरोधक तार की लम्बाई दूनी कर दी गयी है तो उसका प्रतिरोध भी दूना हो जायेगा और चूँकि I = 

अर्थात् I ∝ R

अतः प्रतिरोध दूना होने पर धारा का मान आधा रह जाता है इसलिए अमीटर का पाठयांक आधा रह गया।

प्रश्न 4.

(i) जब एक विद्युत् परिपथ में एक विद्युत् बल्ब, एक 5 Ω प्रतिरोधक का चालक एवं एक 10 V विभवान्तर की बैटरी श्रेणीक्रम में संयोजित है तो प्रवाहित विद्युत् धारा 1 A होती है तो विद्युत् बल्ब का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।

(ii) अब यदि 10 Ω प्रतिरोध का प्रतिरोधक चालक इस श्रेणीक्रम संयोजन के साथ समान्तर क्रम में संयोजित किया जाता है तो 5 Ω प्रतिरोध के चालक से होकर प्रवाहित धारा में एवं विद्युत् बल्ब के सिरों के बीच विभवान्तर में क्या परिवर्तन होगा? (यदि हो)

हल:

(i) मान लीजिए कि विद्युत् बल्ब का प्रतिरोध r Ω है तो परिपथ का कुल प्रतिरोध

R = r +5 Ω एवं धारा I = 1 A

दिया है: वान्तर V= 10 V

चूँकि

V = IR

⇒ 10 = 1 × (r + 5)

⇒ r + 5 = 10

⇒ r = 10 – 5 = 5 Ω

अतः विद्युत् बल्ब का अभीष्ट प्रतिरोध = 5 Ω है। – उत्तर

(ii) परिपथ में 10 Ω का प्रतिरोध समान्तर क्रम में बल्ब एवं प्रतिरोधक के तुल्य प्रतिरोध 10 Ω के साथ संयोजित है। समान्तर क्रम में संयोजन से दोनों संयोजनों को बराबर उतना ही विभवान्तर 10 V ही प्राप्त होगा। अत: चालक में प्रवाहित धारा एवं बल्ब के सिरों के बीच विभवान्तर में कोई परिवर्तन नहीं होगा।

प्रश्न 5.

तीन विद्युत् बल्ब प्रत्येक 100 वाट के एक परिपथ में श्रेणीक्रम में संयोजित है तथा दूसरे परिपथ में तीन अन्य प्रत्येक 100 वाट के समान्तर क्रम में संयोजित हैं। दोनों परिपथों को एक ही विद्युत् स्त्रोत से विद्युत् धारा प्रदान की जाती है।

(i) क्या दोनों परिपथों के बल्ब समान रूप से प्रकाशित होंगे? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।

(ii) अब प्रत्येक परिपथ से एक बल्ब फ्यूज हो जाता है तब क्या दोनों परिपथों का प्रत्येक बल्ब प्रकाशित होता रहेगा? कारण दीजिए।

उत्तर:

मान लीजिए प्रत्येक बल्ब का प्रतिरोध R Ω तथा स्रोत का विभवान्तर V है।

(i) श्रेणीक्रम में बल्बों का तुल्य प्रतिरोध = 3 R अतः विद्युत् धारा = VR A प्रत्येक बल्ब से प्रवाहित होगी जबकि समान्तर क्रम में प्रत्येक बल्ब को V वोल्टेज विभवान्तर मिलेगा। अतः उनमें प्रत्येक बल्ब से VR A धारा प्रवाहित होगी अर्थात् श्रेणीक्रम के बल्ब से तीन गुना अधिक। इसलिए समान्तर क्रम के बल्ब अधिक रोशनी (चमक) से प्रकाशित होंगे।

(ii) जब प्रत्येक परिपथ से एक-एक बल्ब फ्यूज हो जाता है तो श्रेणीक्रम के बल्ब तो प्रकाशित होना बन्द कर देंगे क्योंकि धारा प्रवाह रुक जायेगा तथा समान्तर क्रम के बल्ब यथावत् प्रकाशित होते रहेंगे।

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