NCERT Solutions for Class 12 Biology Chapter 3 Human Reproduction (मानव जनन) PDF in Hindi

NCERT Solutions Class 12 Biology Chapter 3 human Reproduction in Hindi जीव विज्ञान mp board, up board, Rajasthan board और Bihar board के छात्र हैं Jeev Vigyan Class 12 Biology Chapter 3 Important Questions and answer, notes खोज रहे हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए हेल्पफुल होगा इस आर्टिकल में Class 12 Biology chapter 3 jeevon me Janan solution in Hindi pdf download करना बताया गया है NCERT Solutions for Class 12 Biology Chapter 3 Human Reproduction (मानव जनन) PDF in Hindi

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पुस्तक NCERT
कक्षा 12 वीं
विषय जीव विज्ञान
अध्याय 3 – मानव जनन
केटेगरी NOTES & SOLUTION
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प्रश्न 1.रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. मानव …………… उत्पत्ति वाला है। (अलैंगिक/लैंगिक)

2. मानव ……………. हैं। (अंडप्रजक/सजीव प्रजक/अंडजरायुज)

3. मानव में ……………. निषेचन होता है। (बाह्य/आंतरिक)

4. नर एवं मादा युग्मक …………… होते हैं। (अगुणित/द्विगुणित)

5. युग्मनज ……………. होता है। (अगुणित/द्विगुणित)

6. एक परिपक्व पुटक से अंडाणु (ओवम) के मोचित होने की प्रक्रिया को ……………. कहते हैं।

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7. अंडोत्सर्ग (ओव्यूलेशन) ……………. नामक हॉर्मोन द्वारा प्रेरित (इन्ड्यू स्ड) होता है।

8. नर एवं स्त्री के युग्मक के संलयन (फ्यूजन) को …………… कहते हैं।

9. निषेचन ……………. में संपन्न होता है।

10. युग्मनज विभक्त होकर ……………. की रचना करता है जो गर्भाशय में अंतर्रोपित (इंप्लांटेड) होता है।

11.भ्रूण और गर्भाशय के बीच संवहनीय सम्पर्क बनाने वाली संरचना को ……………. कहते हैं।

उत्तर —

  1. लैंगिक
  2. सजीव प्रजक
  3. आंतरिक
  4. अगुणित
  5. द्विगुणित
  6. अंडोत्सर्ग
  7. LH एवं FSH
  8. निषेचन
  9. फैलोपियन नलिका
  10. भ्रूण
  11. अपरा (प्लेसैन्टा)।

प्रश्न 2.पुरुष जनन तंत्र का नामांकित आरेख बनाएँ।

उत्तर-

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प्रश्न 3. स्त्री जनन तंत्र का नामांकित आरेख बनाइए।

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उत्तर-

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प्रश्न 4. वृषण तथा अण्डाशय के बारे में प्रत्येक के दो-दो प्रमुख कार्यों का वर्णन कीजिए।

उत्तर-वृषण के कार्य-

  • शुक्राणुओं का निर्माण करना।
  • वृषण में स्थित अन्तराली कोशिकाओं द्वारा नर हॉर्मोन (टेस्टोस्टेरॉन) उत्पन्न करना जिसके कारण नर में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास होता है।

अण्डाशय के कार्य-

  • अण्डाणु का निर्माण करना।
  • एस्ट्रोजन हॉर्मोन का स्त्रावण करना जो मादा में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों के लिए उत्तरदायी है।

प्रश्न 5. शुक्रजनक नलिका की संरचना का वर्णन कीजिए।

उत्तर-

प्रत्येक वृषण पालिका के अंदर एक से लेकर तीन अतिकुंडलित शुक्रजनक नलिकाएँ (सेमिनिफेरस ट्यूबुल्स) होती है जिनमें शुक्राणु पैदा किए जाते हैं। प्रत्येक शुक्रजनक नलिका का भीतरी भाग दो प्रकार की कोशिकाओं से स्तरित होता है जिन्हें नर जर्म कोशिकाएँ (शुक्राणुजन/स्पर्मेटोगोनिया) और सर्टोली कोशिकाएँ कहते हैं ।

(चित्र (a) देखें)। र जर्म कोशिकाएँ अर्द्धसूत्री विभाजन (या अर्धसूत्रण) के फलस्वरूप शुक्राणुओं का निर्माण करती है जबकि सर्टोली कोशिकाएँ जर्म कोशिकाओं को पोषण प्रदान करती है। शुक्रजनक नलिकाओं के बाहरी क्षेत्र को अंतराली अवकाश (इंटरस्टीशियल स्पेस) कहा जाता है।

इसमें छोटी-छोटी रूधिर वाहिकाएँ और अंतराली कोशिकाएँ (इंटरस्टीशियल सेल्स) या लीडिंग कोशिकाएँ होती हैं (चित्र देखें)। लीडिंग कोशिकाएँ पुंजन (एंड्रोजन) नामक वृषण हॉर्मोन संश्लेषित व स्त्रावित करती हैं। यहाँ पर कुछ अन्य कोशिकाएँ भी होती हैं जो प्रतिरक्षात्मक कार्य करने में सक्षम होती हैं । वृषण की शुक्रजनक नालिकाएँ वृषण नलिकाओं के माध्यम से शुक्रवाहिकाओं में खुलती हैं। यह शुक्रवाहिका वृषण से चलकर अधिवृषण में खुलती हैं, जो प्रत्येक वृषण के पश्च सतह पर स्थित होती हैं। यह अधिवृषण शुक्रवाहक की ओर बढ़ते हुए उदर की ओर ऊपर जाती हैं और

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मूत्राशय के ऊपर की ओर लूप बनाती हैं । इसमें शुक्राशय से एक वाहिनी आती है और मूत्र मार्ग में स्खलनीय वाहिनी के रूप में खुलती है। ये नलिकाएँ वृषण से प्राप्त शुक्राणुओं का भंडारण तथा मूत्र मार्ग से इनका बाहर स्थानांतरण करती हैं।

प्रश्न 6. शुक्राणुजनन क्या है ? संक्षेप में शुक्राणुजनन की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।

उत्तर-

  • शुक्राणुजनन (Spermatogenesis)-प्रजनन अंगों में युग्मकों के निर्माण की प्रक्रिया को युग्मकजनन कहते हैं। जब युग्मकजनन की क्रिया वृषण में होती है तथा शुक्राणुओं का निर्माण होता है तब इसे
  • शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) –कहते हैं। शुक्राणुओं का निर्माण जनन उपकला (Germinal Epithilium) द्वारा होता है। शुक्राणुजनन की क्रिया निम्नलिखित चरणों में पूर्ण होती है
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1. द्विगुणन प्रावस्था (Multiplication Phase)-

वृषण में शुक्राणु नलिकाओं (Seminiferous tubules) की दीवार जर्मिनल एपिथीलियम से स्तरित होती है। कुछ जर्मिनल एपिथीलियम बड़े आकार की हो जाती हैं, जिसे स्पर्मेटोगोनियम (Spermatogonium) कहते हैं। जर्मिनल एपिथीलियम में समसूत्री विभाजन द्वारा स्पर्मेटोगोनियम का निर्माण होता है।

2. वृद्धि प्रावस्था (Growth Phase) –

इस प्रावस्था में स्पर्मेटोगोनियम भोज्य पदार्थ का संचय करके बड़े आकार की हो जाती है, जिसे प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट (Primary spermatocyte) कहते हैं।

3. परिपक्वन प्रावस्था (Maturation Phase)-

इस प्रावस्था में प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट का दो बार विभाजन होता है। प्रथम विभाजन अर्द्धसूत्री होता है, जिससे गुणसूत्र की संख्या आधी रह जाती है। इन अगुणित कोशिकाओं को द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट (Secondary spermatocyte) कहते हैं। द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट का दूसरा परिपक्वन विभाजन होता है, जिससे 4 कोशिकाएँ बनती हैं। इन कोशिकाओं को स्पर्मेटिड (Spermatid) कहते हैं। इन 4 स्पर्मेटिड से 4 शुक्राणुओं (Sperms) का निर्माण होता है।

प्रश्न 7. शुक्राणुजनन की प्रक्रिया के नियमन में शामिल हॉर्मोनों के नाम बताइए।

उत्तर–

शुक्राणुजनन की प्रक्रिया के नियमन में निम्न हॉर्मोन शामिल होते हैं-

  • गोनैडोट्रॉपिन रिलीजिंग हॉर्मोन
  • ल्यूटीनाइजिंग हॉर्मोन (LH)
  • फॉलिकल स्टीमुलेटिंग हॉर्मोन (FSH)
  • टेस्टोस्टेरॉन।

प्रश्न 8. शुक्राणुजनन एवं वीर्यसेचन (स्परमियेशन) की परिभाषा लिखिए।

उत्तर—

  • शुक्राणुजनन (Spermatogenesis)-अगुणित, अचल व शुक्राणु कोशिकाओं का चल (Motile) व प्रारुपिक शुक्राणु कोशिका में रूपान्तरण शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) कहलाता है।
  • वीर्यसेचन (Spermiation)-शुक्राणुजनन के पश्चात् शुक्राणु का शीर्ष सरटोली कोशिकाओं में धंस जाते हैं तथा अंत में शुक्राणुजनन नलिका से मुक्त हो जाते हैं, यह प्रक्रिया वीर्यसेचन (Spermiation) कहलाती है।

प्रश्न 9. शुक्राणु का नामांकित आरेख बनाइए।

अथवा

शुक्राणु की संरचना का नामांकित चित्र बनाइए एवं विभिन्न भागों का वर्णन कीजिए।

उत्तर-

संरचना-शुक्राणु नर युग्मक है। यह अगुणित संरचना एवं नर जनन इकाई है। शुक्राणु जनन (Spermatogenesis) द्वारा शुक्राणु का निर्माण होता है।

शुक्राणु का शरीर तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है

  1. सिर भाग (Head piece)
  2. मध्य भाग (Middle piece)
  3. पूँछ (Tail)

1. सिर भाग (Head piece)—सिर का .. आकार शंक्वाकार होता है। इस भाग पर ऐक्रोसोम पाया जाता है। यह शुक्राणु को अण्डाणु में प्रवेश के लिए सहायता करता है। इस भाग में केन्द्रक (Nucleus) एवं केन्द्रकीय पदार्थ (Nuclear mate- Middle piece Axial filament rial) पाये जाते हैं। इस भाग में समीपस्थ सेन्ट्रिओल पाया जाता है।

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2. मध्य भाग (Middle piece)—इसमें अक्षीय तन्तु के आधारकाय (Basal body) पाया जाता है। अक्षीय तन्तु के चारों ओर माइटोकॉण्ड्रिया चित्र-शुक्राणु की संरचना का आवरण पाया जाता है। यह भाग शुक्राणु का ऊर्जा केन्द्र है।

3. पूँछ (Tail)—यह शुक्राणु का पिछला एवं पतला भाग है। इसमें अक्षीय तन्तु पाये जाते हैं । यह ऊर्जा की सहायता से प्रचलन कर सकता है।

प्रश्न 10. शुक्रीय प्रद्रव्य (सेमिनल प्लाज्मा) के प्रमुख संघटक क्या है ?

उत्तर–

शुक्रीय प्रद्रव्य (सेमिनल प्लाज्मा ) के प्रमुख संघटक हैं-फ्रक्टोज, कैल्सियम आयन, कुछ एन्जाइम व प्रोस्टाग्लैंडिन्स।

प्रश्न 11. पुरुष की सहायक नलिकाओं एवं ग्रन्थियों के प्रमुख कार्य क्या हैं ?

उत्तर –

पुरुष की सहायक नलिकाओं एवं ग्रन्थियों के प्रमुख कार्य निम्न हैं

1. सहायक नलिकाओं के कार्य

  • वृषण जालिका (Rete Testis)-शुक्रजनन नलिका से प्राप्त शुक्राणुओं को वास इफेरेन्शिया (Vas efferentia) तक पहुँचाना।
  • वास इफेरेन्शिया (Vas efferentia)-अधिवृषण तक शुक्राणुओं को पहुँचाना।
  • अधिवृषण (Epididymis)-शुक्राणुओं को अधिवृषण में संगृहीत किया जाता है । यहाँ शुक्राणुओं का परिपक्वन होता है।
  • शुक्रवाहक (Vas deference)-शुक्राणुओं का वहन करना तथा मूत्रमार्ग द्वारा बाहर स्थानान्तरित करना।

2. ग्रंथियों के कार्य

  • प्रोस्टेट ग्रन्थि (Prostate gland)-इस ग्रंथि का स्राव शुक्राणुओं को सक्रिय बनाता है एवं वीर्य को स्कंदन से रोकता है।
  • बल्बोयूरेथल ग्रन्थियाँ (Bulbourethral glands)-इसका स्राव मादा की योनि को चिकना कर मैथुन क्रिया को सुगम बनाता है।
  • शुक्राशय (Seminal vesicle)-इसका स्राव योनि मार्ग की अम्लीयता को समाप्त कर शुक्राणुओं की सुरक्षा करता है।

प्रश्न 12. अण्डजनन क्या है ? अण्डजनन की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।

उत्तर-

अण्डजनन-वह क्रिया है, जिसके द्वारा अण्डाशय के अन्दर अण्डाणु का निर्माण होता है। ये निम्नलिखित चरणों में पूर्ण होती हैं

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  • प्रोलीफरेशन प्रावस्था-इस प्रावस्था में अण्डाशय के जनन स्तर की कोशिकाएँ विभाजित होकर कोशिका गुच्छ बनाती हैं, जिसे पुटिका (Follicle) कहते हैं। पुटिका की एक कोशिका बड़ी होकर ऊगोनियम बना देती है।
  • वृद्धि प्रावस्था-इस प्रावस्था में ऊगोनिया आकार में बढ़ जाती है, जिसे प्राथमिक ऊसाइट कहते हैं।
  • परिपक्वन प्रावस्था-इस प्रावस्था में प्राथमिक ऊसाइट में अर्द्धसूत्री विभाजन होता है। प्रथम अर्द्धसूत्री विभाजन असमान होता है, जिसमें से बड़ी कोशिका को द्वितीयक ऊसाइट तथा छोटी कोशिका को ध्रुवीय काय कहते हैं । द्वितीय अर्द्धसूत्री विभाजन में द्वितीयक ऊसाइट में फिर से असमान विभाजन होता है, जिसमें से बड़ी कोशिका अण्डाणु का निर्माण करती है। शेष बनी तीनों छोटी कोशिकाओं को ध्रुवीय काय कहते हैं।

प्रश्न 13. अण्डाशय की अनुप्रस्थ काट (ट्रांसवर्स सेक्शन) का एक नामांकित आरेख बनाइए।

उत्तर-

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प्रश्न 14. ग्राफी पुटक (ग्राफियन फॉलिकिल) का एक नामांकित आरेख बनाइए।

उत्तर-

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प्रश्न 15. निम्नलिखित के कार्य बताएँ

(1) पीत पिंड (कॉर्पस ल्यूटियम)

(2) गर्भाशय अंत:स्तर (इंडोमैट्रियम)

(3) अग्रपिंडक (एक्रोसोम)

(4) शुक्राणु पुच्छ (स्पर्मटेल)

(5) झालर (फिम्ब्री)।

उत्तर-

(1) पीत पिंड (कॉर्पस ल्यूटियम)-यह पीत पिंछ भारी मात्रा में प्रोजेस्ट्रॉन स्रावित करता है, जो कि गर्भाशय अंत:स्तर को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

(2) गर्भाशय अंतःस्तर (इंडोमैट्रियम)-गर्भाशय अंत:स्तर निषेचित अण्डाणु के अंतर्रोपण (इम्प्लांटेशन) तथा सगर्भता की अन्य घटनाओं के लिए आवश्यक है।

(3) अग्रपिंडक (एक्रोसोम)-अग्रपिंडक उन प्रक्रिण्वों (एंजाइम्स) से भरा होता है, जो अण्डाणु के निषेचन में मदद करते हैं।

(4) शुक्राणु पुच्छ (स्पर्म टेल)-शुक्राणु के मध्य खंड में असंख्य सूत्रकणिकाएँ (माइटोकॉन्ड्रिया) होती हैं, जो पूँछ को गति प्रदान करने के लिए ऊर्जा उत्पन्न करती हैं जिसके कारण शुक्राणु को निषेचन करने के लिए आवश्यक गतिशीलता प्रदान करना सुगम बनाता है।

(5) झालर (फिम्ब्री)-अण्डोत्सर्ग के दौरान अण्डाशय से उत्सर्जित अण्डाणु को संग्रह करने में ये झालर सहायक होते हैं।

प्रश्न 16. सही या गलत को पहचानें

1. पुंजनों (एंड्रोजेन्स) का उत्पादन सर्टोली कोशिकाओं द्वारा होता है। (सही/गलत)

2. शुक्राणु को सर्टोली कोशिकाओं से पोषण प्राप्त होता है। (सही/गलत)

3. लीडिग कोशिकाएँ अण्डाशय में पाई जाती हैं। (सही/गलत)

4. लोडिग कोशिकाएँ पुंजनों (एंड्रोजेन्स) को संश्लेषित करती हैं। (सही/गलत)

5. अण्डजनन पीत पिंड (कार्पस ल्यूटियम) में सम्पन्न होता है। (सही/गलत)

6. सगर्भता के दौरान आर्तव चक्र (मेन्स्ट्रअल साइकिल) बंद होता है। (सही/गलत)

7. योनिच्छद (हाइमेन) की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति कौमार्य (वर्जिनिटी) या यौन अनुभव का विश्वसनीय संकेत नहीं है। (सही/गलत)

उत्तर-

  1. गलत
  2. सही
  3. गलत
  4. सही
  5. गलत
  6. सही
  7. सही।

प्रश्न 17. आर्तव चक्र क्या है ? आर्तव चक्र का नियमन कौन-से हॉर्मोन करते हैं ?

उत्तर-

आर्तव चक्र (Menstruation)-प्राइमेट्स के मादाओं में पाये जाने वाले जनन चक्र को आर्तव चक्र/मासिक धर्म या रजोधर्म कहते हैं। स्त्रियों में रजचक्र/रजोधर्म/ऋतुस्राव 28/29 दिन का होता है। प्रथम रजचक्र तरुणावस्था (Puberty) में प्रारंभ होता है। इसे रजो दर्शन (Menarche) कहते हैं। आर्तव चक्र के समय स्त्रियों की योनि से महीने में एक बार रक्त स्राव होता है जो 3-5 दिनों तक जारी रहता पचास वर्ष की उम्र में यह चक्र लगभग समाप्त हो जाता है। इस अवस्था को रजोनिवृत्ति (Menopause) कहते हैं । गर्भवती महिलाओं में आर्तव चक्र रुक जाता है। आर्तव चक्र का नियमन निम्नलिखित हॉर्मोन करते हैं

  • गोनैडोट्रॉपिन
  • ऐस्ट्रोजन
  • ल्यूटीनाइजिंग हॉर्मोन
  • फॉलिकल स्टीमुलेटिंग हॉर्मोन (FSH) तथा
  • प्रोजेस्ट्रॉन।

प्रश्न 18. प्रसव क्या है ? प्रसव को प्रेरित करने में कौन-से हॉर्मोन शामिल होते हैं ?

उत्तर-

गर्भवती मादाओं के गर्भस्थ शिशु के बाहर निकलने की क्रिया को शिशु जन्म या प्रसव कहा जाता है। प्रसव एक जटिल तंत्रि-अंत:स्रावी (Neuro-endocrine) क्रियाविधि द्वारा प्रेरित होता है। प्रसव के लिए संकेत पूर्ण विकसित गर्भ एवं अपरा से उत्पन्न होते हैं, जो गर्भाशय में हल्के संकुचन को प्रेरित करते हैं। जिन्हें गर्भ उत्क्षेपन प्रतिवर्त (फीटल इंजेक्शन रिफ्लेक्स) कहते हैं । यह मातृ पीयूष ग्रंथि से ऑक्सीसीटोसीन गर्भाशय पेशी पर क्रिया करता है और इसके कारण गर्भाशय में तीव्र संकुचन प्रारंभ हो जाता है। गर्भाशय संकुचनों तथा ऑक्सीटोसीन स्राव के बीच लगातार उद्दीपक प्रतिवर्त के कारण यह संकुचन अत्यधिक तीव्र होता जाता है। इसके परिणामस्वरूप शिशु माता के गर्भाशय से जनन नाल द्वारा बाहर आ जाता है, इस प्रकार प्रसव की क्रिया सम्पन्न होती है। प्रसव क्रिया को प्रेरित करने वाले प्रमुख हॉर्मोन्स हैं

  • कार्टिसॉल
  • एस्ट्रोजन
  • ऑक्सीटोसीन।

प्रश्न 19. “हमारे समाज में लड़कियों को जन्म देने का दोष महिलाओं को दिया जाता है।” बताइए कि यह क्यों सही नहीं है ?

उत्तर-

स्त्री के गुणसूत्र का स्वरूप XX है तथा पुरुष में XY होता है । इसलिए स्त्री द्वारा उत्पादित सभी अगुणित युग्मकों में X लिंग गुणसूत्र होते हैं जबकि पुरुष युग्मकों (शुक्राणुओं)में लिंग गुणसूत्र या तो X या Y होते हैं, इसलिए 50% शुक्राणु में x लिंग गुणसूत्र होते हैं और दूसरे 50% शुक्राणु में Y लिंग गुणसूत्र होते हैं। इसलिए पुरुष एवं स्त्री युग्मकों के संलयन के पश्चात् युग्मनज में या तो XX या XY लिंग गुणसूत्र की संभावना होगी। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि X या Y लिंग गुणसूत्र वाले शुक्राणुओं में से कौन अण्डाणु का निषेचन करता है। जिस युग्मनज में XX गुणसूत्र होंगे वह एक मादा (लड़की)के रूप में जबकि XY गुणसूत्र वाला युग्मनज नर शिशु (लड़का) के रूप में विकसित होगा। इसी कारण वैज्ञानिक रूप से यह कथन सत्य है कि एक शिशु के लिंग का निर्धारण उसके पिता द्वारा होता है। अत: लड़कियों को जन्म देने का दोष महिलाओं को देना सर्वथा अनुचित है।

प्रश्न 20. एक माह में मानव अण्डाशय से कितने अण्डे मोचित होते हैं ? यदि माता ने समरूप जुड़वा बच्चों को जन्म दिया हो तो आप क्या सोचते हैं कि कितने अण्डे मोचित हुए होंगे? क्या आपका उत्तर बदलेगा यदि जन्मे हुए जुड़वा बच्चे, द्विअण्डज यमज हों?

उत्तर-

प्रतिमाह आर्तव चक्र में अण्डाशय से एक अण्डा मोचित होता है। समरूप जुड़वा बच्चों को यदि किसी माता ने जन्म दिया हो तो दो अण्डे मोचित हुए होंगे। यदि जुड़वा बच्चे, द्विअण्डज यमज हों तो भी मेरा उत्तर नहीं बदलेगा।

प्रश्न 21. क्या आप सोचते हैं कि कुतिया, जिसने 6 बच्चों को जन्म दिया है, के अण्डाशय के कितने अण्डे मोचित हुए थे ?

उत्तर-

कुतिया जिसने 6 बच्चों को जन्म दिया है, के अण्डाशय से 6 अण्डे मोचित हुए थे।


मानव जनन अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

मानव जनन वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1. निषेचन का सम्बन्ध किससे है-

(a) जनद से युग्मक कोशिकाओं का निकलना

(b) नर युग्मक कोशिका का मादा युग्मक कोशिका पर स्थानान्तरण

(c) नर तथा मादा के जनन अंगों का जुड़ जाना

(d) नर युग्मक के केन्द्रक का मादा युग्मक के केन्द्रक से जुड़ जाना।

उत्तर

(d) नर युग्मक के केन्द्रक का मादा युग्मक के केन्द्रक से जुड़ जाना।

प्रश्न 2. विदलन निषेचित अण्डों के विभाजन की ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अण्डा

(a) विभाजित नहीं होता, केवल आकार में वृद्धि होती है

(b) लगातार विभाजित होता है, लेकिन आकार में वृद्धि नहीं होती है

(c) लगातार विभाजित होता है और आकार में वृद्धि होती है

(d) इनमें से कोई नहीं।

उत्तर-

(b) लगातार विभाजित होता है, लेकिन आकार में वृद्धि नहीं होती है

प्रश्न 3. भ्रूणीय झिल्लियाँ उपलब्ध कराती हैं

(a) भ्रूण की रक्षा

(b) भ्रूण का पोषण

(c) भ्रूण की रक्षा और पोषण

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।

उत्तर-

(c) भ्रूण की रक्षा और पोषण

प्रश्न 4. जरावस्था (वयता) का विज्ञान कहलाता है

(a) कालक्रम विज्ञान

(b) दन्त विज्ञान

(c) स्त्री रोग विज्ञान

(d) वृद्ध रोग विज्ञान।

उत्तर-

(d) वृद्ध रोग विज्ञान।

प्रश्न 5. पुरुष की प्रोस्टेट ग्रन्थि का प्रतिरूप मादा में क्या है

(a) बर्थोलिन ग्रन्थि

(b) गर्भाशय

(c) भगशिश्न

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।

उत्तर-

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।

प्रश्न 6.

मनुष्य होता है

(a) अण्डयुज

(b) जरायुज

(c) अण्डजरायुज

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।

उत्तर-

(b) जरायुज

प्रश्न 7. मद चक्र होता है

(a) ऋतुस्राव का

(b) एस्ट्रोजन स्रावण का

(c) गर्भाधान का

(d) रजोनिवृत्ति का।

उत्तर-

(a) ऋतुस्राव का

प्रश्न 8. मानव सहित बहुत से स्तनियों में जरावस्था का कारण है

(a) वातावरण में विपरीत परिवर्तन

(b) आनुवंशिक कारकों तथा वातावरण के मध्य पारस्परिक प्रभाव

(c) कुपोषण तथा तनाव

(d) उपर्युक्त सभी।

उत्तर-

(b) आनुवंशिक कारकों तथा वातावरण के मध्य पारस्परिक प्रभाव

प्रश्न 9. मानव शरीर का कौन-सा अंग पुनर्जनन को प्रदर्शित करता है

(a) प्लीहा

(b) वृक्क

(c) मस्तिष्क

(d) यकृत।

उत्तर-

(b) वृक्क

प्रश्न 10. स्तनधारियों में निषेचन होता है

(a) अण्डवाहिनी कीप में

(b) फैलोपियन नलिका में

(c) गर्भाशय में

(d) योनि में।

उत्तर-

(d) योनि में।

प्रश्न 11. स्तनधारियों के वृषण को ढकने वाले सम्पुट का नाम है

(a) ट्यूनिका एल्बूजीनिया

(b) ट्यूनिका वैसकुलोसा

(c) ट्यूनिका वेजाइनेलिस

(d) ट्यूनिका झिल्ली।

उत्तर-

(a) ट्यूनिका एल्बूजीनिया

प्रश्न 12. सरटोली कोशिका पायी जाती है

(a) शशक के वृषण में

(b) मेढक के वृषण में

(c) स्तनधारी के वृषण में

(d) कॉकरोच केवृषण में।

उत्तर-

(a) शशक के वृषण में

प्रश्न 13.

गैस्ट्रला की गुहा कहलाती है–

(a) ब्लास्टोसील

(b) सीलोम

(c) आर्केन्टेरॉन

(d) हीमोसील।

उत्तर-

(c) आर्केन्टेरॉन

प्रश्न 14. इम्प्लान्टेशन वह क्रिया है जिसमें

(a) अण्डे का निषेचन

(b) अण्डे की गति होती है

(c) अण्डे का विलोपन होता है

(d) गर्भाशय की भित्ती से ब्लास्टोसिस्ट बनता है।

उत्तर-

(a) अण्डे का निषेचन

प्रश्न 15. सेमिनिफेरस नलिकाएँ पायी जाती हैं—

(a) वृषण में

(b) अण्डाशय में

(c) वृक्क में

(d) फेफड़े में।

उत्तर-

(a) वृषण में

2. सही जोड़ी बनाइए’

‘A’ – ‘B’

1. एक्रोसोम – (a) यूरेथ्रा

2. सरटोली कोशिकाएँ – (b) अण्डाशय

3. प्रोस्टेट ग्रंथि –. (c) प्रोजेस्टीरॉन

4. कार्पस ल्यूटियम – (d) वृषण

5. ग्रैफियन पुटिकाएँ –. (e) शुक्राणु।

उत्तर-

1.(e), 2.(d), 3.(a), 4.(c), 5. (b).

‘A’ – ‘B’

1. प्राथमिक जननांग – (a) रिलैक्सिन

2. अपरास्तनी अण्डे – (b) वृषण

3. पुनर्जनन – (c) अपीतकी

4. डिम्ब पुटिकाएँ – (d) यकृत

5. प्रसव – (e) अण्डाशय।

उत्तर-

1.(b), 2.(c), 3.(d),4.(e), 5.(a)

3. एक शब्द में उत्तर दीजिए –

1. शुक्राणु जनन के समय 24 प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट से कितने शुक्राणु बनेंगे?

2. स्तनियों में निषेचन कहाँ सम्पन्न होता है ?

3. अण्डजनन के दौरान एक अण्डे के बनने में कितने ध्रुवीय पिण्ड निकलते हैं ?

4. उस पदार्थ का नाम बताइए जो शुक्राणु को अण्डाणु में प्रवेश की सहायता के लिए शुक्राणुओं में बनता है।

5. डिम्ब पुटिका अण्डाशय से अण्डाणु के मुक्त होने की क्रिया का नाम बताइए।

6. 100 प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट से कितने शुक्राणु तथा 100 प्राथमिक ऊसाइट से कितने अण्डाणु पैदा होंगे?

7. स्तनी शुक्राणु का कौन-सा भाग प्रकिण्व का स्रावण करता है, जिससे यह अण्डाणु में प्रवेश कर सके ?

8. मनुष्य की उस विकासीय अवस्था का नाम बताइए जिसमें यह गर्भाशय की दीवार में प्रत्यारोपित होता है।

9. एक अण्डाणु के निर्माण में कितने ध्रुवीय काय बनते हैं ?

10. शुक्राणु के द्वारा अण्डाणु के कोरोना रेडिएटा में प्रवेश करने के लिए कौन-सा प्रकिण्व स्रावित किया जाता है ?

11. किस अंग में कॉर्पस ल्यूटियम का निर्माण होता है ?

12. मानव निषेचन कहाँ होता है ?

13. मानव गर्भावस्था कितने दिनों की होती है ?

14. मनुष्य के शुक्राणु में कितने ऑटोसोम होते हैं ?

15. उस अवस्था का नाम बताइये जिसमें विकास कर रहा भ्रूण अण्डाशय की दीवार पर स्थापित होता है।

16. ग्रेफियन फॉलिकल से अण्ड के.बाहर निकलने की प्रक्रिया क्या कहलाती है ?

उत्तर-

  1. 96
  2. अण्डवाहिनी,
  3. 2
  4. स्पर्मलाइसिन
  5. अण्डोप्सर्ग
  6. 400, 100
  7. सिर
  8. फीटल अवस्था,
  9. 3.
  10. स्पर्मलाइसिन
  11. अण्डाशय
  12. अण्डवाहिनी
  13. 240 दिन
  14. 22
  15. ब्लास्टुला
  16. अण्डोत्सर्ग।

मानव जनन अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. जायगोट से मॉरुला के बनने की क्रिया किस नाम से सूचित की जाती है ?

उत्तर- विदलन (Cleavage)।

प्रश्न 2. प्रथम ऋतुस्राव को कहते हैं ?

उत्तर – मिनार्की (Menarche)।

प्रश्न 3. स्पर्मेटोजेनेसिस उदाहरण है।

उत्तर – युग्मकजनन का।

प्रश्न 4. गर्भाशय के अंदर फीटस का पोषण कौन करता है ?

उत्तर – अपरा (Placenta)।

प्रश्न 5. गैस्ट्रला अवस्था में कितने जनन स्तर होते हैं ?

उत्तर- तीन।

प्रश्न 6. गैस्टुला के मध्य जनन स्तर को किस नाम से सूचित किया जाता है ?

उत्तर – मीसोडर्म।

प्रश्न 7. मानव शिशु का जन्म निषेचन के कितने दिन बाद होता है ?

उत्तर- 280 दिन (9 माह 10 दिन)।

प्रश्न 8. अपनी ही तरह के नयी पीढ़ी के जीवों को उत्पन्न करने की क्रिया कहलाती है।

उत्तर- प्रजनन।

प्रश्न 9. दो अलग-अलग प्रभेद की कोशिकाओं के संलयन से होने वाला जनन किस नाम से सूचित किया जाता है ?

उत्तर – लैंगिक जनन।

प्रश्न 10. यौवनारम्भ पश्चात् मनुष्य में कौन-सा युग्मकजनन जीवनपर्यन्त चलता रहता है ?

उत्तर – शुक्राणुजनन (Spermatogenesis)।

प्रश्न 11. एक पचास वर्षीय स्त्री का रजचक्र समाप्त होना क्या कहलाता है ?

उत्तर – रजोनिवृत्ति (Menopause)

प्रश्न 12. गर्भावस्था किसे कहते हैं ?

उत्तर – निषेचन से शिशु के जन्म (प्रसव) के बीच के समय को गर्भावस्था कहते हैं।

प्रश्न 13. कॉर्पोरा केवरनोसा कहाँ पाया जाता है ?

उत्तर – कॉर्पोरा केवरनोसा शिश्न (Penis) में पाया जाता है।

प्रश्न 14. हाथी, कुत्ता एवं बिल्ली का औसत गर्भकाल क्या है ?

उत्तर –

  • हाथी 641 दिन
  • कुत्ता और बिल्ली 63 दिन

प्रश्न 15. उस हॉर्मोन का नाम लिखिए जो प्रसव के समय प्यूबिक सिम्फाइसिस का शिथिलन करता है।

उत्तर – रिलैक्सिन हॉर्मोन।

मानव जनन लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. रजोनिवृत्ति किसे कहते हैं ? समझाइये।

उत्तर –

रजोनिवृत्ति–प्रत्येक स्त्री के प्रजनन काल (12-13 वर्ष की उम्र से 45-50 वर्ष की उम्र तक) में गर्भावस्था को छोड़कर प्रति 26 से 28 दिनों की अवधि पर गर्भाशय से रक्त तथा इसकी आन्तरिक दीवार की श्लेष्म का स्राव होता है। यह स्राव 3 या 4 दिन तक चलता है। इसे ऋतु स्त्राव, रजोधर्म, आर्तव या मासिक धर्म (Menses of Menstruation) कहते हैं, चूँकि यह एक निश्चित समयान्तराल पर बार-बार होता है, इस कारण इसे मासिक ऋतु स्राव चक्र (Menstruation Cycle) भी कहते हैं। स्त्रियों में 45-50 वर्ष के बाद ऋतु स्राव नहीं होता, इस अवस्था को रजोनिवृत्ति (Menopause) कहते हैं। रजोनिवृत्ति के बाद गर्भधारण की क्षमता समाप्त हो जाती है तथा स्तन भी ढीले हो जाते हैं।

प्रश्न 2. मनुष्य के वृषण के अनुप्रस्थ काट का केवल नामांकित चित्र बनाइए।

उत्तर-

NCERT Solutions for Class 12 Biology Chapter 3 Human Reproduction (मानव जनन) PDF in Hindi
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प्रश्न 3. मादा प्रजनन तन्त्र में फैलोपियन नलिका कहाँ स्थित होती है ? इसका क्या महत्व है ?

उत्तर – मादा प्रजनन तन्त्र में फैलोपियन नलिका दो की संख्या में उदरगुहा के निचले प्रतिपृष्ठ हिस्से में अण्डाशय तथा गर्भाशय के बीच में स्थित होती है। प्रत्येक नलिका की लम्बाई लगभग 10 cm होती है। इसका एक सिरा स्वतंत्र तथा कीप के समान होता है, जबकि दूसरा सिरा गर्भाशय से जुड़ा रहता है । कोप के समान सिरा अण्डोत्सर्ग से निकले अण्डाणु को ग्रहण करके इसे अपने अन्दर की सीलिया की गति के प्रभाव से गर्भाशय में पहुँचाता है । अण्डाणु देहगुहा में स्वतंत्र होते समय पूर्णतः परिपक्व नहीं होता, अत: इसका परिपक्वन फैलोपियन नलिका में ही होता है। इन दो कार्यों के अलावा अण्डवाहिनी में ही निषेचन की क्रिया भी सम्पन्न होती है। इस प्रकार नलिका मादा प्रजनन तन्त्र का मुख्य भाग है।

प्रश्न 4. पुरुषों में होने वाले द्वितीयक लैंगिक लक्षण लिखिए।

उत्तर-

  1. आवाज भारी हो जाता है।
  2. चेहरे पर मूंछ व दाढ़ी निकल आता हैं तथा शरीर के अन्य भागों पर बाल निकल आते हैं।
  3. शरीर सुडौल और बलशाली हो जाता है।
  4. कंधे चौड़े हो जाते हैं।
  5. वृद्धि के कारण शरीर लम्बाई में बढ़ जाता है। उपरोक्त लैंगिक लक्षणों का विकास युवावस्था प्रारंभ होने का संकेत होता है । यह वृष्ण में टेस्टोस्टीरॉन बनना प्रारंभ होने के कारण होता है। यह परिवर्तन 12 वर्ष से 16 वर्ष की आयु में होता है।

मानव जनन दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. स्पर्मेटोजिनेसिस और ऊजेनेसिस में अन्तर समझाइये।

उत्तर-

स्पर्मेटोजिनेसिस और ऊजेनेसिस में अन्तर.

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प्रश्न 2. मनुष्य में कॉर्पस ल्यूटीयम के निर्माण तथा कार्य को समझाइए।

उत्तर-

कॉर्पस ल्यूटीयम का निर्माण अण्डाशय में होता है। अण्डोत्सर्ग अर्थात् अण्डाणु के डिम्ब पुटिका तथा अण्डाशय से बाहर निकलने के बाद डिम्ब पुटिका में एक घाव बन जाता है, जिसमें रुधिर भरा रहता है। इस समय पुटिका को कॉर्पस हीमोरेजिकम (Corpus Haemorrhagicum) कहते हैं। जल्दी ही इस पुटिका की रुधिर से भरी गुहा में पुटिका कोशिकाएँ भर जाती हैं। अब इस पुटिका को कॉर्पस ल्यूटीयम (Corpus Lutium) कहते हैं।

कॉर्पस ल्यूटीयम के बनने और संरक्षण तथा अण्डोत्सर्ग (आदि पुटिका से डिम्ब पुटिका तक का बनना) का नियंत्रण पीयूष ग्रन्थि के हॉर्मोनों E.S.H. और L.H. के द्वारा होता है। यदि अण्डोत्सर्ग के बाद अण्डाणु का निषेचन हो जाता है तब तो कॉर्पस ल्यूटीयम गर्भ के सातवें महीने तक रहता है, लेकिन जब निषेचन नहीं हो पाता, तब यह विलुप्त हो जाती है। यह कॉर्पस ल्यूटीयम कुछ हॉर्मोन्स का निर्माण करता है जो गर्भधारण तथा दुग्ध निर्माण को प्रेरित करते हैं।

प्रश्न 3. फैलोपियन नलिका की रचना एवं कार्य लिखिए।

उत्तर-

स्त्री में लगभग 10-10 सेमी लम्बी दो नलिकाएँ उदर गुहा में जननांगों से संबंधित होती हैं जिनका एक सिरा स्वतंत्र तथा झालरदार होता है और अण्डाशय के पास स्थित होता है, इसे फिम्ब्री कहते हैं। इनका दूसरा सिरा गर्भाशय से जुड़ा रहता है । ये नलिकाएँ अण्डाशय से निकले अण्डाणु को फिम्ब्री द्वारा ग्रहण करके गर्भाशय में पहुँचाती हैं। अण्डाणुओं का निषेचन इन्हीं नलियों में होता है। इनकी दीवार पेशीय होती है तथा इनकी आन्तरिक सतह पर सिलिया पाये जाते हैं, जिनकी गति के कारण ही अण्डाणु फिम्बी में आता है। इन नलिकाओं को फैलोपियन नलिका या अण्डवाहिनी कहते हैं। कार्य–अण्डाणुओं को अण्डोत्सर्ग के बाद गर्भाशय में पहुँचाती हैं तथा निषेचन के लिए स्थान प्रदान करती हैं।

प्रश्न 4. अण्डाशय की रचना लिखिए।

उत्तर-

प्रत्येक स्त्री में गर्भाशय के दोनों तरफ एक-एक की संख्या में एक जोड़ी अण्डाशय मीजोवेरियम झिल्ली द्वारा सधे रहते हैं। प्रत्येक अण्डाशय के चारों तरफ एक कोशिका स्तर मोटी जनन उपकला पायी जाती है। इसके अन्दर दो भागों में विभाजित संयोजी ऊतक पाया जाता है, इसके बाहरी भाग को कॉर्टेक्स तथा भीतरी भाग को मेड्यूला कहते हैं। कॉर्टेक्स में हजारों की संख्या में विशिष्ट कोशिकाओं के समूह पाये जाते हैं, जिन्हें अण्डाशयी पुटिकाएँ कहते हैं। ये पुटिकाएँ चार विकासात्मक अवस्थाओं में होती हैं

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आदि पुटक-इनके मध्य में एक अपेक्षाकृत बड़ी कोशिका होती है। इसको घेरे हुए अपेक्षाकृत छोटी कोशिकाएँ स्थित होती हैं।

  • प्राथमिक पुटक-ये आदि पुटकों से विकसित होते हैं।
  • वेसिकुलर पुटक-यह प्राथमिक पुटकों से बनता है। इसमें ऊसाइट के चारों तरफ कई कोशिका की मोटी स्तर पायी जाती है।

प्रश्न 5. निषेचन की क्रिया-विधि का वर्णन एवं इसके महत्व को समझाइये।

उत्तर-

निषेचन (Fertilization)—शुक्राणु (नर युग्मक) तथा अण्डाणु (मादा युग्मक) से मिलकर युग्मनज (Zygote) बनने की क्रिया को निषेचन कहते हैं। मनुष्य में अन्त:निषेचन पाया जाता है, अर्थात् इसके शुक्राणु और अण्डाणु मादा के शरीर के अन्दर मिलते हैं। जब मैथुन के अन्तिम चरण में नर अपने वीर्य को योनि में स्खलित कर देता है, तब गर्भाशय की ग्रीवा की सिरिंज अवशोषण क्रिया के कारण वीर्य गर्भाशय में चला जाता है । इस चलन में शुक्राणु की पूँछ इसकी मदद करती है। स्खलन के समय वीर्य में 20 करोड़ की संख्या में शुक्राणु होते हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश योनि की दीवार के अम्लीय स्राव के कारण मर जाते हैं। इसके अलावा कुछ शुक्राणुओं की हानि मादा के जनन मार्ग के सँकरे और इसकी दीवार के चिपके होने के कारण होती है। शुक्राणुओं की इस बड़ी संख्या में से केवल कुछ शुक्राणु ही गर्भाशय में आते हैं और गर्भाशय में पूँछ की सहायता से 1.5 से 3 मिमी प्रति मिनट की चाल से चलते हुए अण्डवाहिनी में पहुँचते हैं यहाँ तक शुक्राणुओं की संख्या हजारों या सैकड़ों में ही रह जाती हैं ।

अण्डवाहिनी में आकर ये अण्डाणु के चारों तरफ अपने सिर के द्वारा चिपक जाते हैं। इन शुक्राणुओं में से एक शुक्राणु से सम्पर्क स्थान पर अण्डाणु की बाहरी दीवार फूलकर एक निषेचन शंकु (Fertilization cone) बना देती है। निषेचन शंकु सम्भवतः उसी शुक्राणु के साथ बनता है जो सबसे पहले अण्डाणु के सक्रिय भाग (Animal pole = अण्डाणु में एक तरफ कोशिकाद्रव्य की मात्रा अधिक होती है, इस भाग को सक्रिय ध्रुव लेकिन दूसरे अर्धांश में अपेक्षाकृत कम सान्द्र कोशिकाद्रव्य होता है, इस भाग को निष्क्रिय ध्रुव (Vegetal pole) कहते हैं) को स्पर्श करता है। एक शंकु के बनने के बाद अण्डाणु दूसरा शंकु नहीं बनाता जिससे अण्डाणु में केवल एक ही शुक्राणु प्रवेश कर सकता है ।

अण्डाणु की दीवार से चिपकने के बाद शुक्राणु का एक्रोसोम कुछ प्रकिण्वों को स्रावित करता है, जिन्हें सामूहिक रूप से स्पर्म लाइसिन (Sperm lysin) कहते हैं । इसके कारण अण्डाणु की दीवार घुलती जाती है और शुक्राणु धीरे-धीरे अण्डाणु में प्रवेश करता जाता है। ज्यों ही एक शुक्राणु अण्डाणु में प्रवेश करता है अण्डाणु में कुछ ऐसे परिवर्तन हो जाते हैं कि इसमें दूसरा शुक्राणु प्रवेश नहीं करता। शुक्राणु का पूँछ भाग अण्डाणु में प्रवेश नहीं करता, बल्कि अण्डाणु की सतह पर ही विलुप्त हो जाता है और इसका सिर अण्डाणु के केन्द्रक की तरफ आगे बढ़ जाता है। अण्डाणु के चारों तरफ की पुटिका कोशिकाएँ म्यूकोपॉलीसैकेराइड (Mucopolysaccharide) और हाइलूरोनिक अम्ल द्वारा एक-दूसरे से चिपकी रहती हैं।

इसके लिये शुक्राणु हाइलूरोनिडेज (Hyaluronidase) प्रकिण्व स्रावित करता है जो इन्हें अपघटित कर देता है। स्तनियों के शुक्राणुओं में होने वाले उन परिवर्तनों को जो निषेचन में मदद करते हैं, कैपेसिएशन कहते हैं। इस कैपेसिएशन (Capaciation) क्रिया के दौरान एक्रोसोम के चारों तरफ की झिल्ली टूट जाती है जिसके कारण एक्रोसोम द्वारा स्पर्म लाइसिन का स्राव होता है, जिसकी सहायता से अण्डाणु जोना रेडिएटा और जोना पेलुसिडा का भेदन होता है। इन दोनों के बाद अण्डाणु तथा शुक्राणु के सिर की प्लाज्मा झिल्लियाँ भी घुल जाती हैं, फलतः नर तथा मादा युग्मकों के केन्द्रक पास-पास आ जाते हैं और दोनों के कोशिकाद्रव्य मिल जाते हैं।

अब शुक्राणु का केन्द्रक अण्डाणु के केन्द्रक की ओर जाता है और दोनों मिलकर एक द्विगुणित केन्द्रक बना देते हैं इस अण्डाणु को युग्मनज कहते हैं। निषेचन की क्रिया पूर्ण होने में लगभग 2 – 2- 1/2 घण्टे का समय लगता है। अब निषेचित अण्डाणु गर्भाशय की गुहा की ओर बढ़ता है और लगभग सात दिनों में यह गर्भाशय की गुहा में पहुँच जाता है और यह यहीं पर गर्भाशय की दीवार में स्थापित हो जाता है। निषेचन के

बाद भ्रूणीय प्रावस्था प्रारम्भ होती है।

निषेचन का महत्व (Significance of Fertilization)

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  • शुक्राणु के प्रवेश से ही अण्डाणु सक्रिय होता है।
  • निषेचन झिल्ली का निर्माण होता है, जिससे अन्य शुक्राणु अन्दर प्रवेश न कर सकें। मनुष्य में निषेचन झिल्ली का निर्माण नहीं होता है। .
  • निषेचन द्वारा गुणसूत्र की संख्या द्विगुणित हो जाती है।
  • यह आनुवंशिक लक्षणों को धारण करता है।
  • विभिन्न जीव जातियों में भिन्नताएँ निषेचन द्वारा होती हैं।
  • निषेचन के द्वारा अण्डे में घूर्णन होता है। .
  • अण्डाणु में सेन्ट्रिओल नहीं पाया जाता है, जिसे शुक्राणु से प्राप्त करता है एवं बार-बार विभाजित होता

प्रश्न 6. निषेचित अण्डाणु से तीन जनन स्तरों के निर्माण को समझाइए। तीन जनन स्तरों से बनने वाले अंगों का नाम लिखिए।

उत्तर-

निषेचित अण्डाणु में तीन जनन स्तर निर्माण का क्रम निम्नलिखित है

1. मॉरुला (Morula)-

निषेचित अण्डाणु फैलोपियन नलिका में पाया जाता है। निषेचन के बाद निषेचित अण्डाणु में विभाजन प्रारम्भ हो जाता है । विदलन (Cleavage) की क्रिया होलोब्लास्टिक (Holoblastic) होती है। इस क्रिया द्वारा गेंद के समान कोशिकाओं का समूह बनता है, जिसे मॉरुला (Morula) कहते हैं। 3 या 4 दिन के पश्चात् इसका रोपण गर्भाशय में होता है।

2. ब्लास्टुला (Blastula)—

जब गेंद के समान मॉरुला में ब्लास्टोसील (Blastocoel) गुहा का निर्माण हो जाता है, तब भ्रूण की इस अवस्था को ब्लास्टुला (Blastula) कहते हैं।

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3. गैस्टुला अवस्था (Gastrula)-

भ्रूण की इस अवस्था में तीन जनन स्तर का निर्माण होता है। इसमें उपस्थित गुहा को आर्केण्ट्रॉन (Archenteron) एवं उपस्थित छिद्र को ब्लास्टोपोर (Blastopore) कहते हैं। इसमें तीन स्तर एक्टोडर्म, मीसोडर्म एवं एण्डोडर्म का निर्माण होता है।

तीन जनन स्तर का निर्माण (Formation of three Germinal layer)

1. एण्डोडर्म का निर्माण (Formation of Endoderm) –

एम्बियोब्लास्ट (Embryoblast) की कुछ कोशिकाएँ अलग होकर ब्लास्टोसील (Blastocoel) में आ जाती हैं। इन कोशिकाओं में तेजी से विभाजन होकर एककोशिकीय स्तर का निर्माण होता है। इस स्तर को एण्डोडर्म (Endoderm) कहते हैं। एम्बियोब्लास्ट की कोशिकाएँ जो एण्डोडर्म स्तर निर्माण में भाग नहीं लेती हैं, एक मोटे स्तर में एक बिम्ब के समान व्यवस्थित हो जाती हैं, जिसे भ्रूणीय बिम्ब (Embryonic disc) कहते हैं।

2. मीसोडर्म का निर्माण (Formation of Mesoderm)-

एण्डोडर्म के निर्माण के पश्चात् भ्रूण लम्बाई में वृद्धि करता है। इसका एक सिरा पतला एवं दूसरा सिरा मोटा हो जाता है। भ्रूणीय डिम्ब में उपस्थित कोशिकाएँ अलग होना प्रारम्भ कर देती हैं। डिम्ब डिस्क से अलग कोशिकाएँ मोटाई में वृद्धि करती हैं एवं भ्रूणीय डिम्ब सं अलग होकर मीसोडर्म स्तर का निर्माण करती हैं।

3. एक्टोडर्म का निर्माण (Formation of Ectoderm) –

भ्रूणीय डिस्क में बची हुई कोशिकाएँ विभाजित होती हैं एवं एक क्रम में व्यवस्थित होकर एक्टोडर्म का निर्माण करती हैं।

तीन जनन स्तर से बनने वाले अंग

1. एक्टोडर्म (Ectoderm) त्वचा की एपिडर्मिस, तंत्रिका तंत्र अंतरांग, ऐड्रीनल ग्रन्थि का मेड्यूलरी भाग, पीनियल काय, आँख की रेटिना, लेन्स, कॉर्निया, नेसल एपिथीलियम, मुखगुहा, मलाशय।

2. मीसोडर्म (Mesoderm) त्वचा का डर्मिस भाग, वृक्क, जनन अंग, हृदय, लसीका तंत्र, प्लीहा।

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3. एण्डोडर्म (Endoderm)-आहार नाल का म्यूकोसा, आमाशय, आँत की ग्रन्थियाँ, यकृत, अग्नाशय, थायरॉइड, अग्र पीयूष, थायमस, फेफड़े, गिल, प्राथमिक जनन कोशिका।

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